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विभाग ने कहा, AI अपनाइए: शिक्षक कहाँ से शुरू करें, किन बातों का ध्यान रखें

बिहार शिक्षा विभाग के 30 अक्टूबर 2026 के पत्र में विद्यालयों में AI के उपयोग को प्रोत्साहन देने की सलाह है। पत्र आसान शब्दों में, आज से शुरू करने लायक़ तीन काम, और तीन सावधानियाँ।

लेखन: SUYOG टीम4 नवंबर 20267 मिनट

पिछले हफ़्ते एक विद्यालय के स्टाफ़-रूम में एक पत्र की फ़ोटो फ़ोन से फ़ोन घूम रही थी। किसी ने पढ़कर कहा, “अब AI भी सीखना पड़ेगा।” दूसरे ने धीरे से पूछा, “पर शुरू कहाँ से करें? और कहीं कुछ ग़लत तो नहीं हो जाएगा?”

दोनों बातें सही हैं। कुछ नया आता है तो उत्सुकता भी होती है और थोड़ी झिझक भी। यह लेख उसी झिझक को हल्का करने के लिए है।

पत्र क्या कहता है, आसान शब्दों में

बिहार सरकार, शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) ने 30 अक्टूबर 2026 को सभी ज़िला शिक्षा पदाधिकारियों को एक पत्र भेजा है (पत्रांक 04/…-83/2026-2187)। विषय है: विद्यालय एवं अन्य संस्थानों में Artificial Intelligence के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश।

पत्र की मुख्य बातें:

  • मुख्य सचिव, बिहार के पत्र (पत्रांक 429, दिनांक 09.03.2026) से राज्य के संस्थानों में AI के व्यापक उपयोग का निर्देश मिला है। सूचना प्रावैधिकी विभाग का संकल्प (सं. 760, दिनांक 08.05.2026) भी इस बारे में है।
  • पत्र मानता है कि AI से समय बचता है और काम आसान होता है।
  • इसलिए सामान्य परामर्श दिया गया है कि सरकारी विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को AI के उपयोग के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।
  • सरकारी पत्र और परिपत्र लिखने में ChatGPT जैसे AI औज़ारों को उपयोगी बताया गया है।

दो बातें ध्यान देने की हैं। पहली, यह परामर्श और प्रोत्साहन है, किसी पर कोई दबाव या नई ज़िम्मेदारी नहीं। दूसरी, पत्र में पढ़ाने के तरीक़ों या बच्चों की जानकारी के बारे में अलग से कुछ नहीं लिखा है। वह हिस्सा हमें अपनी समझ से सँभालना है।

यह पत्र अभी विभाग की वेबसाइट पर हमें नहीं मिला। इसकी पुष्टि और आगे के निर्देशों के लिए अपने प्रखंड या ज़िला शिक्षा कार्यालय से जानकारी ले लें।

मेरे लिए इसका मतलब क्या है

सोचिए, गया ज़िले के किसी मध्य विद्यालय की एक शिक्षिका। कक्षा 7 में 58 बच्चे, दिन में छह घंटियाँ, और शाम को अगले दिन की तैयारी। उनके लिए AI का मतलब कोई बड़ी मशीन नहीं, बल्कि एक ऐसा सहायक है जो पहला मसौदा जल्दी बना दे, ताकि उनका समय सोचने, सुधारने और बच्चों के साथ बैठने में लगे।

यही बात दुनिया भर में कही जा रही है। UNESCO ने 2023 में शिक्षा में जनरेटिव AI पर पहला वैश्विक मार्गदर्शन जारी किया। उसमें ज़ोर इस बात पर है कि AI का उपयोग मनुष्य-केंद्रित हो, यानी फ़ैसला और ज़िम्मेदारी इंसान के हाथ में रहे। उसमें शिक्षकों के प्रशिक्षण, बच्चों की निजता की सुरक्षा, और कक्षा में बच्चों के ख़ुद AI इस्तेमाल करने के लिए 13 साल की न्यूनतम उम्र की बात भी है।

हमारे देश में भी NCERT और CBSE ने कक्षा 3 से 8 के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI का पाठ्यक्रम शुरू किया है। यानी AI अब शिक्षक का औज़ार भी है और आगे बच्चों का विषय भी।

चार्ट-पेपर पर हाथ से बना चित्र: AI से आज से शुरू करने लायक़ तीन काम, पाठ की रूपरेखा, प्रश्न-पत्र का पहला मसौदा, अभिभावक को संदेश या पत्र का मसौदा

आज से शुरू करने लायक़ तीन काम

1. पाठ की रूपरेखा (पाठ टीका का पहला मसौदा) AI से कहिए: “कक्षा 8, विज्ञान, अध्याय कोशिका। 40 मिनट की घंटी के लिए शुरुआत की एक छोटी कहानी, तीन मुख्य बातें, एक गतिविधि जो 50 बच्चों की कक्षा में बिना सामग्री के हो सके, और अंत में 5 छोटे सवाल।” जो मिले, उसे पढ़िए, अपने बच्चों के हिसाब से बदलिए, और उदाहरण अपने गाँव-मोहल्ले से जोड़िए। रूपरेखा AI की, कक्षा आपकी।

2. प्रश्न-पत्र या साप्ताहिक जाँच का पहला मसौदा “कक्षा 6, गणित, भिन्न। 20 अंक का प्रश्न-पत्र: 5 बहुविकल्पी, 5 छोटे उत्तर, 2 सोचने वाले सवाल, उत्तर-कुंजी के साथ।” हर सवाल और हर उत्तर ख़ुद हल करके देखिए। AI कभी-कभी आत्मविश्वास से ग़लत उत्तर भी दे देता है।

3. अभिभावक को संदेश या विद्यालय का पत्र अभिभावक बैठक की सूचना, किसी बच्चे की अच्छी बात का संदेश, या प्रधानाध्यापक के लिए किसी रिपोर्ट का मसौदा। पत्र में भी इसी काम का ज़िक्र है। AI भाषा साफ़ और विनम्र बनाने में मदद करता है। तथ्य, तारीख़ और पत्रांक आप ख़ुद भरिए और जाँचिए।

मुफ़्त सामग्री: ऐसे ही AI से पूछने के 25 तैयार सवाल, पाठ की तैयारी से विद्यालय के पत्र तक। एक टैप में कॉपी करें, या प्रिंट करके रख लें।

शुरुआत के लिए इनमें से एक काम चुनिए। हफ़्ते भर वही कीजिए। हाथ बैठ जाए, तब दूसरा।

तीन सावधानियाँ, जो हमेशा साथ रहें

चार्ट-पेपर पर हाथ से बना चित्र: AI सहायक, शिक्षक नायक, तीन नियम: बच्चों के नाम नहीं रोल नंबर, हर तथ्य जाँचें, आख़िरी फ़ैसला शिक्षक का

1. बच्चों के नाम और निजी जानकारी AI में न डालें। “रीना, रोल 12, पढ़ाई में कमज़ोर है” जैसा कुछ कभी न लिखें। ज़रूरत हो तो “एक बच्चा, जिसे भाग देने में कठिनाई है” लिखें। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में भी बच्चों की जानकारी के लिए माता-पिता की सहमति ज़रूरी बताई गई है। बच्चों की निजता हमारी ज़िम्मेदारी है।

2. AI का लिखा हर तथ्य जाँचें। AI कभी-कभी ग़लत तथ्य, ग़लत आँकड़े या ऐसी किताब का नाम भी लिख देता है जो है ही नहीं। पाठ्यपुस्तक से मिलाइए। तारीख़, पत्रांक और नियम हमेशा आधिकारिक स्रोत से लीजिए।

3. आख़िरी फ़ैसला शिक्षक का। AI सहायक है, शिक्षक नायक। कौन-सा उदाहरण आपके बच्चों के मन तक पहुँचेगा, कहाँ रुककर सवाल पूछना है, किस बच्चे को आज हौसले की ज़रूरत है, यह AI नहीं जानता। आप जानते हैं।

आम भ्रम

  • “AI आ गया, अब शिक्षक की ज़रूरत कम हो जाएगी।” उल्टा है। AI काग़ज़ का काम घटाता है, ताकि शिक्षक का समय बच्चों को मिले। सोचना सिखाना, हौसला देना और भरोसा बनाना इंसान का काम है।
  • “अंग्रेज़ी आनी चाहिए।” नहीं। आज के AI औज़ार हिंदी में भी सवाल समझते और जवाब देते हैं।
  • “महँगा फ़ोन या कंप्यूटर चाहिए।” एक सामान्य स्मार्टफ़ोन और थोड़ा इंटरनेट काफ़ी है।
  • “AI जो लिखे, सीधे बच्चों को दे दें।” नहीं। पहले ख़ुद पढ़ें, जाँचें, बदलें। तभी वह आपकी कक्षा के लायक़ बनता है।

कल की कक्षा में

आज शाम कल की किसी एक घंटी के लिए AI से पाठ की रूपरेखा बनवाइए। उसमें से सिर्फ़ एक चीज़ अपनी कक्षा में आज़माइए: शुरुआत की कहानी, या अंत के 5 सवाल। घंटी के बाद कॉपी में एक पंक्ति लिखिए: क्या काम आया, क्या बदलना पड़ा।

आपके लिए एक सवाल

अगर हर दिन आपके 30 मिनट बच जाएँ, तो आप वह समय अपनी कक्षा के किस एक काम में लगाना चाहेंगे?

उसी जवाब में आपके लिए AI का सही उपयोग छिपा है।


प्रिय शिक्षक, नई चीज़ सीखने की उम्र नहीं होती, बस पहला क़दम होता है। आपने चॉक से ब्लैकबोर्ड तक, और रजिस्टर से मोबाइल तक हर बदलाव को अपनाया है, और हर बार बच्चों के लिए। AI भी उसी सफ़र का एक और औज़ार है। उसे अपनी समझ, अपने अनुभव और अपने प्यार के साथ बरतिए। तब यह सचमुच आपका सहायक बनेगा।

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स्रोत

  • बिहार सरकार, शिक्षा विभाग, निदेशक (प्रशासन) का पत्र, पत्रांक 04/…-83/2026-2187, दिनांक 30.10.2026, विषय: विद्यालय एवं अन्य संस्थानों में Artificial Intelligence के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश (शिक्षकों के बीच साझा प्रति; पुष्टि के लिए अपने ज़िला शिक्षा कार्यालय से संपर्क करें)।
  • UNESCO, Guidance for Generative AI in Education and Research (2023): unesco.org
  • संयुक्त राष्ट्र समाचार: UNESCO ने स्कूलों में AI के उपयोग के लिए नियमों की बात कही, सितंबर 2023: news.un.org
  • आकाशवाणी समाचार: NCERT और CBSE ने कक्षा 3 से 8 के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI का पाठ्यक्रम शुरू किया: newsonair.gov.in
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय: meity.gov.in

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